Tuesday, 6 July 2010

शादी में नहीं बुलाया तो क्या हुआ-हम तो कवर करते हैं

रवीश कुमार

आज न्यूज़ चैनल किसी शादी का वीडियो अल्बम लग रहे थे। ग्राफिक्स आर्टिस्टों की मदद से धोनी को शेरवानी से लेकर पगड़ी तक पहना दी गई थी।जिन पंडितों,ज्योतिषियों को धोनी की कुंडली बांचने का मौका न मिला वो स्टुडियो में आकर धोनी और साक्षी की जन्मपत्री बांच रहे थे। बता रहे थे कि गज़ब का संयोग है। जोड़ी निभेगी। अगर टूटेगी तब इन ज्योतिषियों के साथ क्या इंसाफ होगा मालूम नहीं। शायद लाइब्रेरी से निकाल कर ये टेप प्ले किये जायेंगे। देखो झूठा निकला ये ज्योतिष। आजकल लोग कई बार शादियां करते हैं इसलिए ऐसा कह रहा हूं।

ग्राफिक्स आर्टिस्टों ने क्या आइडिया निकाला। ये और बात है कि नाम आइडिया उत्पादक संपादकों का होगा। न्यूज़ रूम में कई लोग गुटका चबाते हुए कहेंगे कि ये फ्रेम मेरा आइडिया था और इस वाले का आइडिया मैंने दिया था। बीच में कोई शरारती किसी के आइडियो को अपना बताकर माहौल गरमा देगा। जैसा कि हर शादी में होता है। एकाध बाराती भड़क जाते हैं। बस मैं यह चाहता हूं कि बारात लौटे तो न्यूज़ चैनलों को इस कामयाबी में प्रोड्यूसर और ग्राफिक्स डिज़ाइनर गुमनाम न रह जाए। विनीत कुमार को ग्राफिक्स आर्ट और टीवी पर भी कुछ लिखना चाहिए।

हर देश में सेलिब्रिटी की ज़िंदगी खबर है। टाइगर वुड्स की बेवफाई पर अमेरिकी अखबारों को उठा कर देख लीजिए। हमारे हिन्दी चैनलों की तारीफ होनी चाहिए। एक शादी पर लोगों ने कितने एंगल निकाले। आजतक ने कपिल देव और मदनलाल को बिठाकर चर्चा की। कपिल से उनकी शादी की चर्चा की। लगता है धोनी ने कपिल पा को नहीं बुलाया फिर भी कपिल पा जी ने धोनी की तारीफ की कि बिना सूचना के शादी की। धोनी ने दिखावा नहीं किया। एंकर ने लेडी लक की बात कही। देखना है साक्षी से शादी धोनी को विश्वकप दिलाएगा या नहीं। बेचारी साक्षी। अगर इंडिया हार गया तो सब कहीं यह न कहने लगे कि मनहूस निकली साक्षी।

इसी के कदम पड़े धोनी के जीवन में और कप हाथ से निकल गया।

आम तौर पर दूल्हों को मालूम नहीं होता कि कितनी देर घोड़ी पर बैठे। आजतक ने बताया कि धोनी पांच मिनट तक घोड़ी पर बैठे। विक्रांत के सवाल के जवाब में मदन लाल ने कहा कि मैं तो घोड़ी पर पांच मिनट से ज्यादा बैठा था। दोस्तों ने घोड़ी से उतरने नहीं दी। आज तक की यह चर्चा लाजवाब रही। कपिल पा जी ने कहा कि इस दिन को कोई नहीं भूलता। उसके बाद तुरंत गाना बजा दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है, दुल्हन का तो दिल दीवाना लगता है। नुसरत साहब के इस गाने से मजा आ गया।

तभी आजतक पर बारात से लौटा घोड़ी वाला फ्रेम में एंटर करता है। हिन्दी पत्रकारिता के किसी भावी स्मार्ट रिपोर्टर की तरह। उसने जो आंखें देखा हाल बयान किया उस पर अलग से लिखा जाना चाहिए। थोड़ा सा लिख देता हूं। आजतक ने घोड़ीवाले से बात की। बताया कि जॉन अब्राहम को बराबर से देखा। वो घोड़ी के बराबर खड़े थे। डांस किसी ने नहीं की। इंग्लिश गाने ही बजे। घोड़ी वाला भी पत्रकार की तरह बता रहा था कि और शादी में एक घंटा लगता है लेकिन इसमें तो मुश्किल से पांच मिनट नहीं लगे। सभी रिपोर्टर हंसने लगे। उसकी बातों से ऐसा लगा कि रिपोर्टरों ने उसे तैयार कर भेजा था कि बॉस ये ये चीज़ें देखकर आना और फिर बताना। किसी रिपोर्टर ने यह भी पूछ दिया कि खाना खाया तुमने। घोड़ी वाले ने कहा कि खाना नहीं खाया। कैसा कप्तान निकला अपना। घोड़ीवाले को बिना खिलाये भेज दिया। काहे का सेलिब्रिटी भइया। हेडलाइन बनाना चाहिए था कि कैसा निकला रे तू माही,खाना भी नहीं खिलाया घोड़ी वाले को।

शादी के सारे वीडियो अल्बम में इस्तमाल होने वाले गानों को सभी चैनलों ने बजाया। एक बार एक बैंड वाले से पूछा था कि एक गाना बताओ जो तुम गरीब से लेकर अमीर तक की शादी में बजाते हो। तो उसने कहा था कि आज मेरे यार की शादी बजाए किसी शादी से नहीं लौटा हूं। आज तक ने इसकी जानकारी दी। एनडीटीवी इंडिया के थोड़े से कवरेज में फार्मेट वीडियो अल्बम वाला ही था। बैकग्राउंड में वही गाने बजे। आज तक के विक्रांत ने कहा कि करोड़ों दर्शक जानना चाहते हैं कि शादी में किस तरह का माहौल है। जवाब में रिपोर्टर ने बताया कि फैन्स काफी दुखी है। आज तक का कवरेज थोड़ा चटकदार और चटकीला लगा। कपिल और मदन लाल की मौजूदगी अलग लुक दे रहा था।

आईबीएन सेवन ने बताया कि धोनी मांगलिक है। सुपर लगा था कि किस्मत की साक्षी। वही बात जो गांव घरों में लोग लड़की को तरसाते हैं। देखो तुम्हारी किस्मत अच्छी है इसलिए इंजीनियर से शादी हो रही है। धोनी से शादी न होती तो न जाने साक्षी की किस्मत क्या होती। खैर यह बताया गया कि धोनी मांगलिक हैं। कुंडली के बारहवें ग्रह में मंगल है। इसलिए शादी से पहले खूब पूजा हवन हुए।

आज के कवरेज पर अलग से लिखा जाना चाहिए। हिन्दी न्यूज़ चैनलों के पास आइडिया की कमी नहीं। नैतिकतावादी बहस करेंगे,रोयेंगे कि देखो पत्रकारिता का क्या हाल हो गया है। वैसे धोनी शादी नहीं करते तो भगवान जाने रविवार का दिन कैसे कटता। मुझे इसी बात का अफसोस रह गया। धोनी सोमवार को शादी करते तो बीजेपी के भारत बंद की बैंड बज जाती। एक विजुअल तक नहीं चलता। महंगाई की मारी जनता टीवी पर धोनी की शादी में मुंह मारती रह जाती। अब भी चांस है। अगर धोनी और साक्षी कल एक सेकेंड के लिए मीडिया के सामने आ जाएं तो मैं भी देखता हूं महंगाई मुद्दा है या माही।

स्टार न्यूज ने खूब कवरेज की। साक्षी के हुए माही,रांची में दीवाली और देहरादून में बारात आदि सुपर लगाए। यहां भी वीडियो अल्बम की तरह डिजाइन बनी थी। दिलाकार वाले खांचे में धोनी और साक्षी को फिट कर दिया गया था। रांची में दोस्तनुमा लफंगों को नाचते हुए दिखाया गया। धोनी रांची में शादी करते और लोकल बाराती होते तो इसी तरह के डांस होते। रिसोर्ट में भागकर धोनी ने उन्हें मौका नहीं दिया तो क्या हुआ स्टार ने कमी पूरी कर दी। हिन्दुस्तान की जनता भी ग़ज़ब है। मिठाई बांटने लगी। बच्चे गुलाल लगाने लगे। क्या जश्न था। जितना रिसोर्ट में नहीं होगा उतना न्यूज चैनलों पर था। भोपाल की दामिनी का मैसेज सरक रहा था कि धोनी तुम दोनों साथ रहो। देश भर से बधाई संदेश भेजे रहे थे। ऐसा नहीं था न्यूज चैनल ही बैंड बजा रहे थे। पब्लिक भी एसएमएस के ज़रिये धोनी की खबरिया बारात में नाच रही थी।

स्टार न्यूज़ ने शादी में बजा पहला गाना सुनाया। पंजाबी गाना था कि तैनू दूल्हा किन्ने बनाया भूतनी के। इस गाने को डीजे ने बजाया। जिस पर क्रिकेटर थिरके। दीपक चौरसिया ने इसे बिजली संकट से जोड़कर अपना टच दे दिया। कहा कि कैप्टन कूल की शादी है और यहां बिजली नहीं है। स्टार न्यूज के अनुसार धोनी ने काली शेरवानी पहनी थी लेकिन आज तक पर घोड़ी वाला बता रहा था कि शेरवानी क्रीम कलर की थी। स्टार के अनुसार साक्षी ने भूरे रंग का लहंगा पहन रखा था। स्टार न्यूज़ ने यह भी बताया कि आइये सुनाते हैं वो दूसरा गाना जिसे डीजे ने बजाया। नगाड़ा नगाड़ा बजा। अरे भाई आज मेरे यार की शादी कब बजा या बजा की नहीं,कोई बतायेगा। आजतक के अनुसार बजा था। स्टार के अनुसार तो पहले दो गानों में नहीं था। स्टार का तुर्की वा तुर्की कवरेज शानदार था। लेख लिखते वक्त दीपक चौरसिया ने मेरी आवाज सुन ली और अपने चैट में कह दिया कि लगता है कि आज मेरे यार की शादी ज़रूर बजाया गया होगा। श्योर नहीं थे लेकिन कोई बात नहीं। जवाब तो दिया न। मैं भी यह लेख लाइव रिपोर्टिंग देखकर साथ ही साथ लिख रहा था।

महेंद्र सिंह धोनी ने क्या समझ रखा है टीवी पत्रकारों को। बारात में इज्ज़त से नहीं बुलायेंगे तो ख़बर नहीं मिलेगी। हिन्दी न्यूज चैनलों ने दिखा दिया कि धोनी बंद कमरे में भी शादी करते तो भी लाइव कवरेज करने और दिखाने की ताकत हैं उनमें। कोई नहीं समझेगा कि हिन्दी के पत्रकार किस दबाव में किस तरह डिलिवर करते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि टीआरपी की लड़ाई में बाज़ी कौन मारेगा। यह भी अंदाज़ा लगता है कि न्यूज़ चैनल किस लेवल पर कंपटीशन करते हैं। सारे चैनलों ने शानदार और मज़ेदार कवरेज किए। सब एक से बढ़कर एक। मजा आया। यही न्यूज़ चैनल थे जिन्होंने ऐश्वर्य और अभिषेक की शादी का कवरेज तो किया था लेकिन इतना शानदार नहीं। हो सकता है कि मैं स्मृति लोप का शिकार हो गया हूं मगर माही-साक्षी के कवरेज में वो भी संडे के दिन,इतने कम नोटिस पर जो कवरेज का स्तर था(अच्छा या बुरा वो सेमिनार में बोलूंगा)लाजवाब था। हिन्दी पत्रकारिता ने आज शादी काल गढ़ दिया। अब आगे से शादियां इससे भी बेहतर और व्यापक पैमाने पर कवर की जायेंगी। यह लेख भी शायद यही सोचकर लिख रहा हूं कि भावी संपादक रेफरेंस के तौर पर देख सकेंगे कि क्या क्या हुआ था और उन्हें नया क्या क्या करना है।

आज मैं उन नैतिकतावादियों में शामिल नहीं हूं जो पत्रकारिता के खत्म होने का मर्सिया पढ़ रहे होंगे। जिसकी मौत कई साल पहले हो चुकी है उस पर रोज़ रोज़ मर्सिया पढ़ कर क्या फायदा। न्यूज़ चैनलों की इस शादी के बारात में शामिल हो जाइये वर्ना कोई नौकरी भी नहीं देगा। धोनी की शादी बड़ी ख़बर तो है ही। लेकिन यही खबर है अब यह विषय फालतू हो चुका है। इस होड़ में इंग्लिश चैनल वाले भी थे लेकिन उनका कवरेज थर्ड क्लास रहा। सारी कुलीनता धरी की धरी रह गई। हिन्दी के रिपोर्टर की तरह उन्हें बारात में घुसने का रास्ता नहीं मालूम था शायद। अगर यह सब बाज़ार के दबाव में हुआ तो यह कहना चाहिए कि दबाव में चैनलों ने अच्छा काम किया। तालियां।

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